Saturday, April 16, 2011

कितने बिनायक ?



बिनायक सेन जैसे ना जाने कितने सामाजिक कार्यकर्ता जेल की चक्कियां पिस रहे हैं . कल का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला काफी सुकून देने वाला रहा ... वरना हर चीज से विश्वास उठता जा रहा था ...
क्या देश है, कहीं कोई करोड़ों का घोटाला खुलेआम कर रहा है फिर भी उच्च पद पर कायम है, किसी विश्वविद्यालय का कुलपति खुलेआम उलटे-सीधे काम कर रहा है फिर भी पद पर कायम है , और तो और कसाब जैसे लोगों को भी जेल में अच्छी खासी सुविधा उपलब्ध है . पर अगर आप कोई सामाजिक कार्य कर रहे हैं तो आपकी खैर नहीं है ... आपने ये गलत धंधा चुना क्यों, सरकार इसके सख्त खिलाफ है... अब बिनायक सेन क्यों CMC वेल्लूर से पढाई करने के बाद गरीबों के इलाज में अपना जीवन बर्बाद किये ...
जरा एक नजर बिनायक बाबु द्वारा किये गए गुनाह पर डालें : (साभार : दैनिक भास्कर )
  • जेल में बंद नारायण सान्याल द्वारा विनायक सेन को लिखा गया पोस्टकार्ड। इस पर जेल अथॉरिटी की मुहर लगी हुई थी। इसमें स्वास्थ्य व मुकदमे के बारे में लिखा हुआ था।
  • जेल में बंद मदन लाल बंजारा(सीपीआई-एम के सदस्य) द्वारा सेन को लिखा गया पत्र।
  • एक बुकलेट, जिसमें सीपीआई (पीपुल्स वार) और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के एकता के बारे में लिखा हुआ था।
  • 4 पन्ने के पत्र की फोटोकॉपी। एंटी-यूएस इंपिरियलिस्ट फ्रंट गठित करने संबधी बातें थी।
  • अंग्रेजी में लिखे हुए लेख की फोटो कॉपी। इसका शीर्षक था ‘नक्सल मूवमेंट, ट्राइबल्स एण्ड वूमेंस मूवमेंट’।
मानों ऐसा लग रहा है कि हम ब्रिटिश राज्य में आ गए हों ... जहाँ कोई देशभक्ति से जुड़ा पत्र आपके लिए फ़ासी का फंदा साबित हो सकता था .
ऐसे कई मामले पिछले दिनों आयें हैं ... ये अलग बात है आज के TRP वाले मीडिया के दौर में ऐसे समाचारों की कोई अहमियत नहीं होती है .
कुछ और बिनायक
--> सुधीर ढवले
--> सीमा आजाद
--> लक्ष्मण चौधरी
और कई लोगों को तो सीधा ऊपर का रास्ता हिन् दिखाया जाता है ...
कुछ और समाचार लिंक इस विषय से जुड़े आप देखें :
ये लो राजद्रोह, वो लो राजद्रोह

और तीसरी दुनिया के जनवरी अंक को पढना ना भूलें ...




Saturday, April 09, 2011

सूचना और रोजगार की गारंटी के साथ मौत की भी ...

भाई ये नयी स्कीम है हमारे सरकार की , शायद आपको पता नहीं हो . अगर आप सूचना के अधिकार या रोजगार गारंटी का उपयोग किसी नेक कार्य के लिए करने जा रहे हैं तो आपके मौत की गारंटी मुफ्त में सरकार के तरफ से मिलेगी... हाँ आपके मरने के बाद अगर कोई और इस कार्य को आगे बढ़ने का प्रयास करेगा तो उसका भी यही हश्र किया जाएगा.

इस लिए इन नए योजना का लाभ उठाने से पहले जरा इस पर आप एक बार जरुर गौर फरमा लें. और भाई ये मत सोचना की आम जनता आपके सहयोग के लिए आगे आएगी ... हमें तो अपनी दाल-रोटी और जुगाड़ से मतलब है बाकी दुनिया जाए भाड़ में ...

और हाँ स्तिथि देश के हर कोने में एक जैसी है ...

MNREGA

एक और

Saturday, February 26, 2011

नो स्मोकिंग इन कैम्पस... एक भद्दा मजाक

इस देश में जो भी नियम बनते हैं केवल नियम के लिए हिन् बनाये जाते हैं... २००८ में ये नियम आया की किसी भी सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करना वर्जित होगा.. जो इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें २०० का दंड देना होगा .

और हो क्या रहा है जरा एक नजर देखें ...
सबसे पहले शैक्षणिक स्थलों का जायजा लिया जाए . आप देश के किसी भी प्रसिद्ध संस्थान में जाएँ वहां आपको कैम्पस में बच्चे खुलेआम फूंकते हुए नजर आ जायेंगे ... बच्चे तो बच्चे शिक्षकगण भी शामिल पाए जायेंगे . खुद इस मुद्दे पर पत्रिका में लिखेंगे नियम बनायेंगे और फिर खुद उल्लंघन करेंगे ... फिर ऐसे नियम बनाये हिन् क्यों जाते हैं . आप जायिए IIM अहमदाबाद उसके दरवाजे पर हिन् आपको धुम्रपान की सारी सुविधा मिल जायेगी. आप जायिए NIFT गांधीनगर, उसके कैम्पस से ५० मीटर की दुरी पर सब उपलब्ध होगा ... बहुत हिन् मन खिन्न हो जाता है ऐसे दृश्य को देख कर. अभी मैं भी एक कॉलेज में पढ़ा रहा हूँ .. चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता हूँ .


ऐसे न जाने कितने नियमों का उल्लघन हमारी आँखों के सामने होते रहता है और हम मूकदर्शक बनकर देखते रहते है ...

ऐसे नियम तो बस एक मजाक हिन् हैं और क्या हम कह सकते हैं ...

Monday, November 22, 2010

कोसी यात्रा २०१०

हमारे मित्र चन्दन जी ने इस वर्ष भी कोसी की यात्रा करने का मन बनाया है और वहां के गरीब लोगों के बीच कम्बल बाँटने के पिछले वर्ष के काम को इस वर्ष भी जारी करने का निश्चय किया है . ये सिलसिला २००७ से शुरू हुआ है ...
और हमलोग पिछले ३ वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में ये कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं . एक कम्बल का मूल्य करीब १२५-१५० रूपये आता है . पर ये रकम इन गरीब लोगों के लिए काफी बड़ी होती है... ठंडक के दिन में इस क्षेत्र में कड़ाके की ठण्ड पड़ती है ... इनके लिए ये १ कम्बल जीवनदायनी सिद्ध होती है .. प्रति वर्ष बाढ़ आने के कारन इस क्षेत्र में गरीबी का प्रभाव कुछ ज्यादा हिन् है..

तो हम में से अगर हर कोई १-१ कम्बल दान करने का भी प्राण करे तो कई गरीबों की जान बच सकती है...

आप सभी ब्लॉगर बहनों-भाइयों से सविनय निवेदन है की इस कार्य में सहयोग करें ...

आप इस बारे में ज्यादा जानकारी हमारे बाढ़ बचाव कार्य के ब्लॉग पर देख सकते हैं ...

Monday, August 16, 2010

क्या वाकई हम स्वतंत्र हैं?...

स्वतंत्र हुए हमें ६३ साल हो गए... हर साल १५ अगस्त को हम इसका जश्न भी मनाते हैं, लता जी की आवाज में सुबह-सुबह "ऐ मेरे वतन के लोगों ..." और न जाने कितने देश भक्ति गीत सुनते हैं .. कुछ मीठा भी खाते हैं ध्वजारोहण के बाद और फिर दिन भर का आराम यही है हमारा स्वतंत्रता दिवस ...

अब किसी भी स्वतंत्रा दिवस समारोह में जाने की इक्षा नहीं होती है ...सब एक ढकोसला लगता है ..क्या वाकई हम स्वतंत्र हैं? नहीं ...पहले अंग्रेजों का राज था , और आज भ्रष्ट नेता और अफसरशाही का ... पहले गैरों ने लूटा और आज अपनों ने ...
आज भी हमारा देश गुलाम है भूखमरी का , भ्रष्टाचार का , चापलूसों का ...और न जाने ऐसे कई भयंकर बिमारियों का ...
अगर आप यहाँ सत्य के लिए आवाज उठाओ तो मौत की गारंटी पक्की है ...न जाने पिछले १ साल में कितने RTI कार्यकर्ता की मौत हुई है ...अभी कुछ दिन पहले अहमदाबाद में RTI कार्यकर्ता अमित जेतवा की हत्या हाईकोर्ट परिसर के बाहर कर दी गयी है ...जांच चल रही है पर पता है कुछ नहीं होने वाला है ...कुछ महीने पहले पुणे में रत्नाकर शेट्टी की हत्या हुई , आज तक CBI जाच में कुछ भी सामने नहीं आया है ...और ना जाने ऐसे कितने केस हैं ...

देश में भूखमरी की हालत कई अफ़्रीकी देशों से भी ख़राब है ...और हम इस स्वतंत्रा पर गर्व करते हैं ...जब दिल्ली में लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं और देश के विकास यात्रा की बात करते हैं उसी समय ना जाने कितने बच्चे इस देश में अकालमृत्यु के शिकार हो जाते हैं...

मुझे शर्म आती है ऐसी आजादी पर और खास करके ऐसे आजादी के महोत्सव पर ...अभी देश आजाद नहीं है ...एक और लड़ाई की जरुरत है और ये लड़ाई पहले की आजादी की लड़ाई से कहीं ज्यादा मुश्किल है क्योंकि हमें अपनों से हिन् लड़ना हैं...

परसाई जी के एक पुराने व्यंग्य की कुछ पंक्तिया आपलोग पढ़िए इस अवसर पर ...

गणतन्त्र का तोहफा
गणतन्त्र का छठवाँ वर्ष भी पूरा हुआ .
अपूर्व सफलता का सेहरा जबरदस्ती हमारे सर बाँधा गया !
समाजवादी ढंग की रचना की घोषणा हो गयी . केवल घोषणा हो गयी, याने कांग्रेस के वैज्ञानिकों ने सुख का कृत्रिम सूरज बनाकर अवाडी में दिखाया और फिर जवाहर जैकिट की जेब में रख लिया, ताकि जनसभाओं में जेब में से निकलकर दिखाया जा सके .

पंडित नेहरु की विदेश यात्रा हुई और भारत शांति का मसीहा बन गया . दुनिया में शांति कायम कर रहा है

घर में शांति की जरुरत नहीं है . बाहर देश का नाम ऊँचा होने से उस देश के आदमी को भूख नहीं लगती . इसलिए जब-जब पंडित नेहरु शांति-यात्रा की तब-तब इस देश के गरीबों को अजीर्ण हो गया !

गरीब और दुबला हुआ . धनि और मुटाया .

और इस तरह गणतन्त्र का छठवाँ वर्ष समाप्त हुआ . सफल हुआ .
अनेक वर्ष ऐसे ही आते रहें और इसी तरह चलता रहे . मंत्रियों की संख्या बढे, शोषण के नए तरीके निकलें, कांग्रेसी बैल के सींग और नुकीले हों, भ्रष्टाचार दिन-दिन बढ़ें, गुंडागिरी पनपे, विधानसभा सदस्यों का भत्ता बढे, पुलिस को नींद की दवा वितरित हो .

Sunday, March 28, 2010

ये कैसा न्याय ?

जी हाँ ६ साल और ३ महीने के बाद एक शहीद को जो न्याय मिलना चाहिए नहीं मिला...उनकी आत्मा हमेशा भटकती रहेगी ...
मैं बात कर रहा हूँ सत्येन्द्र दुबे जी की ....कल पटना में एक अदालत ने ३ लोगों को इस केस में आजीवन कारावास की सजा दी...

ये सजा न्याय के नाम पर नौटंकी नहीं तो और क्या है...मैं तो कहता हूँ की इन तीनों को हिन् सजा देनी थी सीबीआई को तो फिर ये ६ साल और ३ महीने की देरी क्यों...कोई अपनी जान देश के ऊपर न्योछावर किया और उसे आप एक चोरी और लूटपाट का केस बना कर छोड़ देते हैं ...इस से तो अच्छा अंग्रेजी राज था जहाँ देश के लिए मरने वालों को शहीद का दर्जा तो कम-से-कम मिलता था ...यहाँ तो वो भी नसीब नहीं ...

और जरा सीबीआई का बयान पढ़िए ...

The CBI conducted “an impartial, fair and professional investigation in the case,” the agency said in a statement.
इस से अच्छा होता की इस केस की कोई जांच नहीं होती ...ना हिन् इतने धन की बर्बादी होती और ना हिन् आम आदमी को एक आशा लगी रहती की सीबीआई जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ...

मैं बस सीबीआई से इतना हिन् कहना चाहूँगा की न्याय नहीं दिलवा सकते तो नहीं दो ...पर एक देशभक्त की शहादत को चोरी के केस में मत बदलो...सत्येन्द्र दुबे की हत्या इन तीन लोगों ने नहीं इस देश के भ्रष्ट नेता और माफियाँ वाले लोगों ने की है ...ये कोई चोरी या लूटपाट का केस नहीं है ...दुबे जी ने अपनी जान सत्य की लड़ाई के लिए न्योछावर की है ...और उन्हें सीबीआई या यहाँ की भ्रष्ट न्याय प्रणाली से कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए...

Monday, December 28, 2009

तुम क्या उनके परिवार के हो ?

बहुत दिनों से कुछ लिख नहीं रहा था ...लिखने की इक्षा मर गयी है ..क्या फायदा है लिख कर जो होना है वही होगा . अपने आप को कई बार इतना असहाय महसूस करता हूँ की ...

अभी १-२ दिन पहले देखा एक इंजीनियर(उपेन्द्र शर्मा) के परिवार वालों को फिर से धमकाया जा रहा है , उन्हें मारने की धमकी दि जा रही है . इन सब के बाद भी इनका केस थानेदार लिखने को तैयार नहीं है . इस समाचार को पढने के बाद मैंने सोचा क्यों न उस जिला के SP से संपर्क किया जाए और उनसे अनुरोध किया जाए की इस केस को दर्ज करें और उपेन्द्र शर्माऔर उनके परिवारवालों के हिफाजत का प्रयाप्त इन्तेजाम किया जाए .

आप सभी को जानकार शायद आश्चर्य होगा (वैसे नहीं होना चाहिए !!!) की जब मैंने SP साहब से बात की ती वो काफी गुस्से में आ गए और पूछे की "तुम क्या उनके परिवार के हो ?" मैंने कहा नहीं .. तो उनका जवाब था "अपने काम से मतलब रखो और ज्यादा दिमाग मत लगाओ , अभी तुम्हे जीवन में बहुत कुछ सीखना होगा ..."

इतना कह कर जनाब ने बिना मेरा जवाब सुने हिन् फ़ोन काट दिया ...

तब से ये प्रश्न मेरे जेहन में बार-बार आ रहा है "तुम क्या उनके परिवार के हो ?"

Friday, November 27, 2009

सत्येन्द्र दुबे जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

सत्येन्द्र दुबे जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

आज से ६ साल पहले आज के हिन् दिन सत्येन्द्र दुबे जी की निमर्म हत्या कर दी गयी थी . आज भी उनकी आत्मा न्याय के लिए तड़प रही होगी....क्या इस देश में ऐसे वीर सपूतों को न्याय मिलेगा कभी...या उनका बलिदान व्यर्थ हिन् जाएगा...और भविष्य में जो भी सत्य के पथ पर चलेगा उसे ऐसा धमकाया जाएगा की "देखें नहीं थे की सत्येन्द्र दुबे का क्या हाल हुआ था, तुम्हारा भी वही हश्र होगा " .
मैं जब भी इन विषयों के ऊपर सोचता हूँ तो अपने आप को बहुत निसहाय मह:सूस करता हूँ ...देश में न्याय प्रणाली के ऐसे हालत होने के बाद भी हमारे प्रधानमंत्री देश से हजारो मिल दूर बैठ कर देश के "जनतंत्र" पर गर्व फरमाते हैं ...
खैर छोडिये इन बातों को ...
अभी पिछले दिनों मैंने फिर से प्रयास किया था की सत्येन्द्र दुबे जी के केस में कुछ किया जाए . शैलेश गाँधी जी के article से प्रभावित होकर मैंने एक RTI PMO में डाला पर उसका कोई जवाब नहीं आया ..
कुछ व्यक्तिगत समस्याओं में उलझने के कारन फिर उसका अपील नहीं कर पाया . वैसे आप सभी को बता दूं की शैलेश गाँधी एक बड़े RTI एक्टिविस्ट थे, पर अब वो एक सरकारी मुलाजिम(मुख्य सूचना अधिकारी ) हो गए हैं ...और जब मैंने उनसे इस केस में मदद मांगी तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया ...

अभी भी CBI के वेबसाइट पर इस केस का पूरा अपडेट उपलब्ध नहीं है. आप एक नजर यहाँ डालें

आखिरी समाचार मीडिया में इस केस से जुडा २३ जून २००८ को आया था . इस केस से जुडा आरोपी फरार हो गया है ...ऐसे केस से जुड़े आरोपी को तो फरार करना हिन् पड़ता है, इसमें नया क्या है ...
मुझे पता नहीं उनके परिजन किस हालत में हैं, ...कभी इकषा है इस बारे में पता करून. देखिये कब हो पाता है ...

कुछ और ब्लॉग पर सत्येन्द्र जी की चर्चा है , एक नजर वहां भी डालें ...

ईमान मर नहीं सकता (एक कविता सत्येन्द्र दुबे जी को समर्पित ) केशवेन्द्र कुमार की तरफ से

कब बदलेगी यह नौकरशाही...

Wednesday, November 25, 2009

सीबीआई जाँच : वही ढाक के तीन पात...


योगेन्द्र पाण्डेय जी के केस की जाँच सीबीआई के द्वारा वही ढाक के तीन पात साबित हुई . जब सीबीआई टीम का नेत्रित्व श्री S P सिंह जी कर रहे the, तो उन्हें कुछ हिन् दिनों में हटा दिया गया, क्योंकि उनके निशाने पर कुछ बड़े लोग थे ...और एक नए ऑफिसर को इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया श्री एम पि नायर को . श्री नायर आज तक एक बार भी घटना स्थल का मुआयना करने नहीं गए और पिछले महीने सीबीआई ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौप दी और इसे आत्महत्या घोषित कर दिया ...

वह रे सीबीआई जांच और इस देश की न्याय प्रणाली ...

इस से जुड़े समाचार के कुछ लिंक

Link 1

Link 2

और हाँ इस विषय पर एक चलचित्र भी बन रही है यहाँ देखें

Friday, October 16, 2009

इस दीवाली पर ज्ञान के दीप जलाएँ और पुस्तक दान करें...

एक बढ़ी हिन् अनूठी परियोजना के बारे में पता चला मुझे कुछ दिन पहले . पुस्तक दान करें और अगर जरुरत है तो अपनी जरुरत इस वेबसाइट पर रजिस्टर करें


यह एक बहुत हिन् बढियां प्रयास है कर्मयोग वेबसाइट के तरफ से .

तो आप सभी अपने आस-पास के जरूरतमंद संस्थाओं की सूचि ढूंढें और जायिए कल दीप पर्व के अवसर पर कुछ पुस्तकों का दान कर आयें...ये पुस्तकें कई जरूरतमंद बालकों के जीवन में प्रकाश भर देंगी...और यही तो दीपावली का उद्देश्य है...

आयिए हम और आप मिलकर ऐसा भारत(साथ में विश्व भी) बनाने का संकल्प ले जहाँ अज्ञान रुपी अन्धकार का कोई जगह ना हो...

Saturday, October 10, 2009

आँध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाढ़ पीडितों की मदद करें ...

जैसा की आप सभी जानते हिन् हैं की पिछले दिनों भरी वर्षा के कारन आँध्रप्रदेश, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में बाढ़ की स्तिथि उत्पन हो गयी है . हम सभी भारत वासियों का कर्त्तव्य बनता है की इस संकट की घडी में हम अपने भाई-बहनों की मदद करें ...

आप अपना मदद उन तक कैसे पंहुचा सकते हैं इस से जुडी कुछ जानकारी मैं इस पोस्ट के जरिये दे रहा हूँ ...

गूँज संस्था की अपील :

Thanks for an overwhelming support to VASTRA-SAMMAN during the Joy of Giving week. Even before the campaign ended the horror of the massive floods sweeping Andhra Pradesh, Karnataka & Maharashtra started unfolding before us.
http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/8290305.stm

This is an URGENT APPEAL to join GOONJ in its campaign ‘RAHAT FLOODS’ to provide support to the victims of one of the worst floods in the last hundred years. The situation is grim and millions of people are affected by the devastation.

GOONJ has been working extensively in disaster relief for many years now. During the devastating Bihar floods last year, with large-scale civic participation, GOONJ channelised about 1500 tonnes of material. More recently, in Cyclone Aila in West Bengal, we were again actively involved in relief operations.

With a wide network of organizations and people present in most of the affected districts we are confident of reaching relief at the earliest possible. While the dispatch of material has already started the need based relief efforts will continue for the next few months.

Possible options for joining this campaign

Material support (Needed- large quantities of..)

Dry ration- Rice, pulses, biscuits, packed eatables
Water purifier tablets
Basic medicines
Sarees & Children clothing
Tarpaulins and thick plastic sheets
Bed sheets, Blankets & Mosquito nets
Export surplus/ Cotton cloth for making sanitary napkins
Stoves, cooking and water storage utensils/buckets
Lanterns, candles, matchbox, torch & batteries
Feeding bottles, ropes
all kind of usable clothing & footwear.

(For the list of collection centers, please log on to www.goonj.info)

Logistical support-

Transport support to reach the material to effected areas
Space for collection centers
Facilities for local pickups,
Transportation of material from different cities to GOONJ processing centers in a few cities.

Financial support-

Donations in India- Please send cash/cheque/draft in the name of GOONJ and send it to GOONJ.., J-93, Sarita Vihar, New Delhi- 76 (Kindly send your full name, address & Pan No. with the contribution for receipt/accounting purpose. (All donations to GOONJ in India are tax exempted u/s 80 G of IT act.)

Overseas donation can reach us through Cheque (in the name of GOONJ with your full particulars) or by wire transfer with an information on ruchikagoonj@gmail.com

Rotate it (valid only for overseas donations) through Wacovia Bank, New York swift code- 2000193008933, GOONJ, A/C No- 2591101004644
Bank- Canara Bank, H block, market Sarita Vihar, New Delhi- 76
Swift Code- CNRBINBBDFS

Contact- GOONJ

H.O Delhi- J-93, Sarita Vihar, New Delhi- 76 Tel.- 011-26972351, 41401216 E-mail- mailgoonj@gmail.com
Mumbai- Mr. Rohit Singh Tel.- 9322381600, Email- rohitgoonj1@gmail.com
Chennai- Mr. Vimal Tel.- 9842665320, Email- vimalgoonj@gmail.com
Kolkata- Mr. Iftikar Tel.- 9748691735, Email- iftikargoonj@gmail.com
Jalandhar- Ms. Daljeet Tel.- 9855023391, Email- daljeetgoonj@gmail.com
Saharsa (Bihar)- Mr. Sheoji Tel.- 9631568989, Email- sheojigoonj@gmail.com

Voluntary set ups-

Hyderabad- Mr. Ramana Tel.- 9849600002 Email- ramanatsv@yahoo.com & Ms. Nitu Tel.- 9908607775, Email- nitu.dhasmana@gmail.com (please call between 7.00 p.m. & 9.00 p.m. only)
Bangalore- Ms. Smitha Tel.- 9986213181 Email- goonjbangalore@gmail.com
Pune- Ms. Gauri Bapat Tel.- 9881090695 Email- goonjpune@gmail.com

Do spread the word, talk to your friends & relatives, help us to organise campaigns in the offices, residential areas and schools.

With best,

Anshu Gupta (Ashoka Fellow)
Founder Director
GOONJ..
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Doctors for you की अपील :
As you are aware of recent floods in Andra pradesh,karnataka and border districts of Maharashtra. Doctors for you is sending team of Doctors and relief material to start Flood relief work there as soon as possible.

Requirements are
Medical and paramedical volunteers minimum for 1 week.
Logistical support-
1) Transport support to reach the material to effected areas
2) Space for collection centers
3) Facilities for local pickups
Relief materials required:
  1. Saree and children cloths (salwar kameez not required)
  2. Tarpaulins and thick plastic sheets
  3. Baby Milk powder
  4. Chlorine tablets and Liquid Drops
  5. Dry ration (either in package of 10kg, 20kg, 50 Kg)-Rice, pulses, biscuits, packed eatables
  6. General Medicine
  7. Bed sheets, Blankets & Mosquito Net
  8. Stoves, cooking and water storage utensils/buckets
  9. Lanterns, candles, matchbox, torch & batteries
  10. Feeding bottles, ropes and also all kind of usable clothinG (Clothings PREFERABLY New One)
  11. Foot ware

Note:
It will be highly appreciable if the donation can be given in terms of monetary donation. The monetary donation allows the organization to save the cost of expenditure on collection of relief materials, transport, stipend to volunteers etc.
All donations are tax exampted under section 80G of Income tax act
Cheque should be in favour of " Doctors for you" payable at Mumbai.

To enable us to send you your tax-exempted receipt:

* Contributions via cheque, please ensure that full details is provided
* Contributions via direct bank-in, please fax us the remittance advice

If you do not receive your tax-exempted receipt within 2 weeks of your contribution, do notify us and we will attend to your request immediately.

For any query, you can call the organization at the following helpline numbers.
HELPLINE :- To support us you can call on

Mumbai: 09324334359 , 09920732168, 09821871945
Delhi: 09268661708

email:- doctorsforyou@gmail.com


आपका छोटा-से-छोटा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है . इस दीपावली के अवसर पर हम कुछ ऐसा करें की आफत में फसे हमारे भाई-बहनों की जिंदगी में थोडा उजियारा आये ...

एक छोटा सा समाचार और भी इसके साथ आपलोगों को बताना चाहूँगा की बलजीत(हॉकी खिलाडी) अब भारत आ गए हैं और उनके आँखों में रौशनी वापस आ गयी है ....फिर भी अभी पूरी रौशनी आने में समय लगेगा ऐसा डॉक्टरों का कहना है . भगवान करे की उनकी आँखों की रौशनी पूरी वापस आ जाए और वो फिर से एक बार भारतीय टीम के लिए खेल पायें ....

Tuesday, September 22, 2009

डॉक्टर पाटिल को भावभिनी श्रद्धांजलि...

शायद हममें से बहुतों को ये याद भी अब नहीं होगा की हम किस चंद्रकांत पाटिल की बात कर रहे हैं ...

हाँ वाही डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल जो पिछले वर्ष बिहार के बाढ़-पीडितों की सेवा के लिए निस्वार्थ भावः से इतनी दूर आये ...जबकि वहीँ पटना में रहने वाले कई डॉक्टर और स्टुडेंट जब जाने से आनाकानी कर रहे थे . पर भगवान को भी अच्छे लोगों की मौजूदगी पृथ्वी पर अच्छी नहीं लगती और डॉक्टर पाटिल को अकाल मृत्यु का शिकार बना लिए ....

कल १ वर्ष हो गया उन्हें मरे हुए...काल रात जब मैंने उनके पिताजी को फ़ोन किया तो बड़े दुखी थे...बोल रहे थे की " मैंने तो सोचा की तू भी भूल गया ..." उन्हें इस बात का थोडा दुःख था की उनके लड़के के मरने १ साल बाद हिन् लोग भूल गए ...

पता नहीं क्यों हमलोग इसके आदि हो चुके हैं की अच्छे लोगों के काम को जल्दी हिन् भूल जाते हैं ...

जो डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल को नहीं जानते हैं वो ये देखें : डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल

Thursday, August 27, 2009

स्वाइन फ्लू और मस्तिष्क ज्वर

अभी पिछले दिनों आप सभी ने स्वाइन फ्लू के चर्चे तो जोरो-शोरों से सुने होंगे ...मैंने अपने पिछले पोस्ट में भी इसकी बात की थी. वैसे अब थोडा इसका माहौल ठंडा हो गया है ...

पर आये दिन कई सामान्य बिमारियों से इस से कहीं ज्यादा संख्या में लोगों की मौत होते रहती है और कोई समाचार भी नहीं मिलता है न हिन् उस से बचाव का कोई ठोस उपाय किया जाता है ...

कल रात में जब विविध भारती के कार्यक्रम सुनने के बाद आकाशवाणी की रात्रि प्रसारण का समाचार को सुना तो पता चला की गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में ६ बचों की मौत मष्तिस्क ज्वर से हो गई ...इस साल में अब तक तक़रीबन 2०० (१८९) बच्चे इस अस्पताल में आखिरी साँस गिन चुके हैं ...

केवल गोरखपुर हिन् नहीं देश के कई अन्य हिस्सों में भी मस्तिष्क ज्वर का परकोप फैला है ...और हर साल कितने हिन् लोग मरते हैं . हाँ पर इन मरने वालों में अधिकतर गरीब होते हैं ..तो ये समाचार फिर महतवपूर्ण क्यों हो ...

असम में कुछ दिन पहले इसी बीमारी से 1 दिन में ४४ लोगों की मौत हो गयी थी .....कहीं कोई ब्रेकिंग न्यूज़ बना था क्या किसी चैनल पर ....

इसके अलावा बिहार और राजस्थान में भी इसका काफी प्रकोप है ...

विशेषज्ञों के मुताबिक मृत्यु दर इस बीमारी में २८-५६ % तक होती है .

Saturday, August 22, 2009

स्वाइन फ्लू और परसाई जी ...

'स्वाइन फ्लू ' जब से आया और जिस तरह से मीडिया में इसका कवरेज हुआ मुझे हर दिन परसाई जी याद आते रहे ....काश अगर परसाई जी होते तो जरुर कुछ इसके ऊपर लिखते . इस बीमारी ने क्या-क्या नहीं किये...
अभी समाचारपत्र में पढ़ रहा था की एक 'स्वाइन फ्लू' का 'किट' आ गया है , कुछ लोग तरह-तरह की दवाएं इसके नाम पर बेच रहे हैं . गुजरात में आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री ४ गुनी बढ़ गयी है इस बीमारी के आने के बाद ....ये बाहर का बीमारी स्वदेशी दवाओं का प्रचार कर रहा है ..क्या कहने इसके . वैसे कई होम्योपैथ वाले भी 'एंटी स्वाइन फ्लू ' दवाएं धड्ले से दे रहे हैं ...

खैर छोडिये इन बातों को और आपलोग परसाई जी के एक पुराने निबंध का आनंद लीजिये . ये स्वाइन फ्लू पर तो नहीं पर डेंगू के ऊपर है . शायद इसमें अभी काफी त्रुटियां मिले आपको, उसके लिए माफ़ी चाहूँगा ...समय मिलते सुधार कर फिर इसे गद्यकोश पर भी चढा दूंगा..

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डेंगू,अध्यात्म और लेखक

इधर एक बीमारी फैली है . नाम उसका भंयंकर है- डेंगू . तेज बुखार और शरीर में बहुत पीडा. जोड़ टूट जाते हैं . जनभाषाओं में 'हड्डी-तोड़' बुखार कहते हैं. हिम्मततोड़ भी है . अगर इस बीमारी का नाम 'डेंगू' न होकर मधुरिमा होता, तो बीमारी के पहले कोई डरता नहीं . हो जाती तो दर्द कम अखरता . मरीज सोचता, यह तो मधुरिमा है . तपेदिक का नाम 'राजयक्ष्मा' कितना अच्छा है . और 'करोंरी थ्राम्बसिस' से रोगी समझ हिन् नहीं पता की जरा देर में खटिया कड़ी होनेवाली है . रोग कितना बुरा हो, नाम अच्छा होना चाहिए . अमरीकी शासक हमले को 'सभ्यता का प्रसार' कहते हैं, वो इतने बुरे नहीं लगते हैं . बम बरसते हैं, तो मरने वाले सोचते हैं सभ्यता बरस रही है . चीनी नेता लड़कों के हुल्लड़ को 'सांस्कृतिक क्रांति' कह्ते हैं, तो पित्नेवाले नागरिक सोचता है की मैं सुसंस्कृत हो रहा हूँ . सांस्कृतिक क्रन्तिवाले सुन्दर बाल-वाले नागरिक को पास की नाई के दुकान में घसीटकर उसका सर घुटवा देते हैं . बाल सवर्ण बुजुरुआ प्रविर्ती है न ! घुटे सर पर जब नागरिक हाथ फेरता होगा, तो कहता होगा-वह, सर पर सांस्कृतिक क्रांति हो गयी . यह 'सांस्कृतिक क्रांति' और आगे बढ़ी, तो कभी आदमी की तरह रहना भी बुजुरुआ प्रविर्ती घोषित हो जाएगा . तब किस जानवर की तरह जीना क्रान्तिकारी जीवन कहलायेगा ? अभी मालूम हो जाए तो शुरू कर दिया जाये .


कह रहा था की रोग कितना ही बुरा हो, उसकी कठोरता कम करने के लिए हम कम-से-कम इतना तो कर हीं सकते हैं, की उसका मीठा-सा नाम रख दें. आश्रम के नाम से चकलाघर चले तो भला हीं लगता है . नैतिक सुधर के नाम से अगर लड़कियाँ भगाई जाएँ, तो किसी को एतराज नहीं होता . डेंगू का नाम मधुरिमा होता, तो मेरा यह दोस्त घबडाकर न कहता- अरे यार, हमें भी डेंगू हो गया . दृश्य दूसरा होता . मैं पूछता - क्यों? बिस्तर पर क्यों पड़े हो ? वह मुस्कुराकर कहता-- थोडी मधुरिमा है . मीठा-मीठा दर्द हो रहा है . मगर नाम के डर के कारन वह १०१ डिग्री बुखार में ही आध्यात्मिक ज्ञान बडबडा रहा था . यों बिना बुखार के वह द्वान्धात्मक भौतिकवाद की बात करता है . बुखार में वह जिव, ब्रम्ह और माया की बात कर रहा था . संसार असार है . शरीर नाशवान है . आत्मा अमर है . ब्रम्ह ही सत्य है . मैंने कहा--यार, तू बड़ा भाग्यवान है . ऋषि-मुनि जिंदगी भर की तपस्या करते थे, तब उन्हें अध्यात्म-बोध होता था . और बाधाएं कितनी थीं--अप्सरा की, दुसरे ऋषि से इर्ष्या की . मगर तुझे सिर्फ १०१ डिग्री बुखार में ही अध्यात्म-बोध हो गया . क्या डेंगू अध्यात्मिक बीमारी है ? तपस्या और बुखार में क्या कोई फर्क नहीं है ? क्या अध्यातम एक तरह का 'डिलीरियम ' है ? अगर है तो इस वक्त शहर में हजारों ज्ञानी हैं. वे डेंगू के बुखार के जरिये आध्यात्मिक भूमिका में पहुच गए हैं .


यों मुझे शक हुआ की यह अभिनय कर रहा है . मैंने कहा भी की यार, १०१ डिग्री में इतना अध्यात्म नहीं आता . १०५-१०६ में आ सकता है . तुम थोड़े बुखार में नाटकीय संभावनाएं खोज रहे हो . राजनीती से लेकर बुखार तक में नाटकीयता प्रभावित करती है . चुनाव में ऊँची जाती का संपन्न उम्मीदवार किसान के घर जाकर कहता है - दददा आज तो हम तुम्हारे घर रोटी खाकर हीं जायेंगे . बाद में किसान सारे गाँव में कहता है - इत्ते बड़े आदमी हैं, पर घमंड बिलकुल नहीं है . (सावधान ! यह नुस्खा पहले आम चुनाव का है . आगामी चुनाव में कोई उम्मीदवार या नाउम्मीदावार इसे काम में न लायें . नुक्सान का जिम्मेदार मैं नहीं . बात यह है की जनता की समझ लगातार बढती गयी है, पर नेता की उतनी रह गयी है )
बात चुनाव की नहीं, नाटकीयता की है . बिना नाटक के काम करो कोई चर्चा नहीं होती . इसका सबसे 'ट्रेजिक' उदाहरण शत्रुघ्न है . दशरथ के चारो लड़कों में सबसे कम नाम इसी का हुआ. बाकी तीनों भाईओं में खूब नाटकीयता थी . मर्यादा पुरुषोतम की तो बात हीं निराली है . लक्ष्मण अजब नाटकीयता से पत्नी को छोड़कर भाई के साथ हो लिए . उन्हें तो अमर होना था. भारत खडाऊं रखकर नंदी ग्राम जा बसे . सब जिम्मेदारी से बरी . बेचारा शत्रुघ्न एक तो गृहस्थी चलाता रहा -- गृहस्थी चलाना बनवास से बड़ा पराक्रम है . फिर तो राज्य का शासन चलाता रहा . यह बड़ा काम था . अगर वह ऐसा न करता, तो राम लौटकर क्या पा लेते ? पर शत्रुघ्न की कोई खास क़द्र नहीं हुई . उसने नाटकीय अंदाज में कुछ नहीं किया .


शत्रुघ्न का दृष्टान्त मैएँ इसलिए दिया की यह अध्यात्म में दुबे मेरे मित्र के डिपार्टमेन्ट का जान पड़ता है . वह भुनभुनाया--जिसे डेंगू नहीं हुआ, वह इस कष्ट को नहीं समझ सकता . तुम्हें (इश्वर चाहेगा) होगा, तब जानोगे की यह नाटक है या नहीं . जानने के लिए होना जरुरी है . इसलिए लोग लेखक के लिए दुःख भोगना जरुरी समझते हैं . नहीं होता तो देने लगते हैं . मुझे डेंगू के दुःख की अनुभूति होनी चाहिए . तुलसीदास को बालतोड़ हुआ था . वे पके बालतोड़ को छूने की पीडा को चरम पीडा मानते थे . लिखा है की राम के राज्याभिषेक की तैयारी की बात सुनकर कैकेयी को ऐसी पीडा हुई जैसे पका बालतोड़ छू दिया हो . महाकवि को जरुर बालतोड़ हुआ था, वर्ना वे एस न लिखते . यह रिसर्च डाक्टरेट के लायक है .


मुझे डर पैदा हो गया . मित्र अध्यात्मिक भूमिका में कह रहा था की तुम्हे डेंगू होगा . शुरू मन से कही गयी बुरी बात जरुर फलवती होती है . क्षुब्ध कामना उतनी कारगर नहीं होती . पुराणों में तपस्वियों के वर और शाप का अनुपात १:३ है.कोई भी टटोल करके देख सकता है . सिद्ध पुरुष गाली ज्यादा देते हैं और भक्त सुनकर खुश होते हैं . मैं डरा की इस बीमार मित्र की बात सही न हो जाए. डर मेरे चारों तरफ है . शहर की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा हमेशा बिस्तर पर पड़ा रहता है . कम्पाउंडरों को डॉक्टर का दर्जा मिल गया है . जिन डॉक्टरों के पास कोई टिंक्चर लगवाने भी नहीं जाता था, उनके दिए हुए 'एंटी बायोटिक्स ' लोग खा रहे हैं .


कहते हैं डेंगू अपनी मौलिक बीमारी नहीं है . बहार से आयी है . फ्लू भी सुना है, जापान से आया है . सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संधियाँ होती हैं, मगर रोग आ जाते हैं. बीमारियाँ अंतर्राष्ट्रीय हो गयीं. हम बाहर की बीमारी ग्रहण करने के लिए बहुत तत्पर रहते हैं . हमने अपनी कोई बीमारी किसी को दी है, मैं नहीं जनता . निर्यात अपना कमजोर है--सामान का हो , चाहे बीमारी का . सुना है, भारतीय गाँजा और भाँग पश्चिम में बहुत पसंद किये जाते हैं . ये धार्मिक नशा है . साधू गाँजा पीकर त्रिकालदर्शी हो जाता है . आल्ड्स हक्सले भी मानता था . नशों के बदले में हम बीमारी ले लेते हैं. पश्चिम को और नशा चाहिए, पूर्व को और बीमारी चाहिए . ज्यों-ज्यों पश्चिम का नशा बढ़ता जाता है, त्यों-त्यों इधर ज्यादा बीमारी भी बढती जाती है . अपनी अर्थ-व्यवस्था को डेंगू हो चूका है . लेटती है तो उठा नहीं जाता . बिठा दो, तो लुढ़क जाती है . पूछता हूँ --माताजी, यह क्या हो गया? कहती है-- बेटा, डेंगू हो गया . बहार से 'इन्फेक्शन' आया था . मेरे बेटे रूपये को भी डेंगू हो गया था . कितना दुबला गया बेचारा .


यह 'इन्फेक्सन' कौन फैलता है ? कहते हैं, आम तौर पर मछ्हर इसे फैलाते हैं . मच्छरों को बीमारी धोने के सिवा कोई काम नहीं. शेर हाथी या बैल 'इन्फेक्शन' नहीं ढोते. मछरों से सावधान रहना चाहिए . वे अब अंतर्राष्ट्रीय सम्पर्क्वाले हो गए हैं . जो बीमारी की जगहें हैं, वहां अपने यहाँ से मछ्हरों को नहीं जाने देना चाहिए . वे बीमारी ले आयेंगे . भारत सर्कार को इसका विशेष ध्यान रखा चाहिए . बीमारी देनेवाले देशों को अपने यहाँ से मछर न भेजा करें . पहले की असावधानी का नतीजा भुगत रहे हैं . डेंगू ले गया अर्थ-व्यवस्था को .

(लेखक को डेंगू हो गया . यह लेख इतना ही लिखा हुआ ८-१० दिनों तक पड़ा रहा . )

बीमारियाँ असहनशील हो गयी है . वे अपना मजाक और आलोचना बर्दास्त नहीं करती . मैं डेंगू के सम्बन्ध में मजाक कर रहा था . उसने बदला ले लिया . मुझे दबोच लिया . मेरा डर बढ़ गया है . बीमारियाँ बदले पर उतर आयीं हैं. मैंने कई बिमारियों को नाराज किया है . अगर वे सब सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक बीमारियाँ जिनका मैंने उपहास किया, बदला लेने लगीं तो लेखक का क्या होगा ? क्या बिमारियों से समझौता कर लूं ? कह दूं की तुम सब खूब फैलो . तुम्हारी जय हो . बस मुझे बचाती रहो .

--हरिशंकर परसाई

कहीं परसाई जी की तरह मुझे भी 'स्वाइन फ्लू' ना हो जाए ..:)

Tuesday, July 21, 2009

कोई बलजीत के लिए भी दुआ कर लो भाई...

बलजीत सिंह दध्वल, शायद ये नाम आपको कुछ भी याद नहीं दिलाता हो...अरे भाई याद भी कैसे आएगा, ना हिन् ये क्रिकेट से जुडा है, और ना हिन् फिल्मी दुनिया से फिर हमें कहाँ से याद आएगा ये नाम ...

तो चलिए आप सबको बता दूं की ये हमारे भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर का नाम है ...नहीं था...

अभ्यास सत्र के दौरान इनके आँख में चोट लग गयी और अब ये ईम्स डेल्ही में भर्ती हैं ...इनके रेटिना में चोट आई है और डॉक्टर बोल रहें हैं की एक हफ्ते के बाद हिन् कुछ पक्का कह सकते हैं की इनकी रोशनी वापस आ पाएगी की नहीं ...

अगर यही कोई क्रिकेट का खिलाडी होता या बॉलीवुड हस्ती तो लोग यज्ञ और न जाने क्या-क्या करते...पर इस गरीब हॉकी खिलाडी के लिए कोई दुआ भी नहीं...

एक अच्छी बात ये सामने आई है की हॉकी संघ बलजीत के ilaaj के सब kharch उठाने को तैयार है ..
आयी हम सब मिलकर प्रार्थना करें की बलजीत भाई की आँख जल्द-से-जल्द ठीक हो जाएँ और वो पुनः हॉकी खेल पायें ...
आमीन ...

चित्र साभार : इंडियन एक्सप्रेस

Tuesday, July 07, 2009

एक और ...

जी हाँ ये है रांची के वन विभाग के अधिकारी अनिल कुमार सिंह जी , जिन्होंने अपने हिन् विभाग के कुछ कर्मचारियों का काला चिट्ठा खोलने का प्रयास किया और हुआ क्या वही जो शाश्वत सत्य है "मौत" . एक नजर डालें The Telegraph की रिपोर्ट पर

दैनिक हिंदुस्तान की प्रस्तुति :

शनिव्ाार को अपराधियों ने राजधानी में पुलिस चौकसी के तमाम दाव्ाों को धता बताते हुए डोरंडा में सरशाम व्ान वि्ाभाग के एक रेंज ऑफिसर (रेंजर) को गोलियों से भून डाला। व्ान मुख्यालय से महज चंद फासले की दूरी पर इस घटना को अंजाम दिया गया। सामने जैप का मुख्यालय, डाकघर और पचास गज की दूरी पर ही रांची आइजी का सरकारी आव्ाास है। सरकारी कर्मियों, पुलिस और सुरक्षा जव्ाानों का यहां हमेशा जमाव्ाड़ा रहता है। हत्यारे घटना को अंजाम देने के बाद आराम से फरार हो गए। अंधेरे में तीर मार रही पुलिस हत्यारों का सुराग नहीं लगा पाई है। सूत्रों के मुताबिक व्ान वि्ाभाग में करोड़ों की ठेकेदारी हत्या की एक व्ाजह हो सकती है। इधर, अपने साथी रंज्ार की हत्या से व्ानकर्मी काफी गुस्से में हैं। रवि्ाव्ाार को संघ की आपात बैठक बुलाई गई है। इसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। जानकारी के मुताबिक व्ान्य प्राणी प्रमंडल में बिल्डिंग वि्ाभाग के रेंज ऑफिसर अनिल कुमार सिंह हर दिन की तरह शाम करीब 6.30 बज्ो दफ्तर से अपनी मारुति व्ौन (संख्या बीआर-01-सी-0922) से लालपुर के आर्या होटल के समीप मोदी कांप्लेक्स स्थित घर के लिए निकले थ्ो। दफ्तर से सौ गज्ा की दूर ही घात लगाए अपराधियों ने उनपर दो गोलियां चलाईं। एक गोली अनिल सिंह के पंज्ारा में एव्ां दूसरी बायें हाथ के केहुनी को चीरती हुई पार निकल गयी। डाकघर के समीप होटल में बैठे लोगों ने गोली की आव्ााज्ा सुनी और उसी दिशा में दौडे। इनमें से कई व्ानकर्मी थ्ो। उन्होंने देखा कि रें’ा ऑफिसर अनिल सिंह व्ौन में खून से लथपथ पड़े हैं। उन्हें तत्काल मेन रोड के राज्ा अस्पताल ले ज्ााया गया। व्ाहां से उन्हें रिम्स भ्ोज्ा दिया गया। रिम्स में ज्ाांच के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। स्व्ा. सिंह मूल रूप से बिहार के सोनपुर के रहनेव्ााले थे। पटना के लोहानीपुर में भी उनका आव्ाास है।

Friday, July 03, 2009

एक कविता सत्य बोलने वालों के नाम ...

धूमिल जी की एक कविता चन्दन जी के सौजन्य से :

मुझसे कहा गया कि संसद
देश की धड़कन को
प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण है
जनता को
जनता के विचारों का
नैतिक समर्पण है
लेकिन क्या यह सच है?
या यह सच है कि
अपने यहां संसद -
तेली की वह घानी है
जिसमें आधा तेल है
और आधा पानी है
और यदि यह सच नहीं है
तो यहाँ एक ईमानदार आदमी को
अपनी ईमानदारी का मलाल क्यों है?
जिसने सत्य कह दिया है
उसका बुरा हाल क्यों है?

-- सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’

इसके साथ-साथ मेरा पिछला पोस्ट भी पढें

धूमिल जी की कुछ और कवितायें इस लिंक पे हैं :http://hindini.com/fursatiya/?p=129

Thursday, July 02, 2009

पांडिचेरी से बिहार तक सत्य बोलने वालों की एक हिन् सजा होती है ...

पांडिचेरी से बिहार तक सत्य बोलने वालों की एक हिन् सजा होती है ...

अपने देश में सत्य बोलने वालों का एक हिन् अंजाम होता है और वो है मौत और गुमनामी ...

एक नहीं अनगिनत लोग भरे पड़े हैं :

किसकी बात करूँ सत्येन्द्र दुबे जी की या मंजुनाथ जी की या फिर कुछ दिन पहले मरे योगेन्द्र पाण्डेय जी की ....वही कहानी दुहरायी जा रही है हर जगह . और हाँ अगर आपलोग सोचते हैं की CBI जाच से कुछ न्याय मिलेगा तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल है ...ऐसी शहादतों ं को CBI चोरी और लूट का केस बना कर ख़तम कर देती है ...

बहुत गुस्सा आता है इस व्यवस्था पर, जिसका मैं भी एक अंग हूँ ....और अपनी अक्रमंयता पर भी...


और हाँ हम जनता भी कितना याद करते हैं इनको, एक दिन के अन्दर हिन् सब भूल जाते हैं ...मीडिया के पन्नों से भी इन लोगों का नाम यूँ हिन् तुंरत गायब हो जाता है ...

क्या करूँ बहुत असहाय महसूस करता हूँ ...पर कुछ तो करना है ...

Saturday, June 13, 2009

अनुत्रिन विद्यार्थियों के लिए एक सन्देश - ऑन डिमांड exam

भाई ये समय है १०विन १२विन और अन्य प्रतियोगिता परीक्षा के परिणामों के आने का ... जिनके बच्चे परीक्षा में उतीर्ण हुए हैं उनके घर माहौल है जश्न का, सभी दे रहे हैं उन्हें बधाइयाँ ...भाई मेरे तरफ से भी सभी सफल प्रत्यासियों को ढेरों बधाइयाँ....

पर मेरा मन हमेशा असफल प्रत्यासियों को लेकर ज्यादा चिंतित रहता है, उनके साथ क्या बीतती है ये मुझे पता है ....खुद गुजर चूका हूँ ऐसे दौर से ...क्या एक इम्तिहान में असफल हो जाना जिंदगी में असफल हो जाना है , क्या सारे रस्ते उस असफल विद्यार्थी के लिए बंद हो जाते हैं ...
नहीं जनाब एक से एक असफल लोग आगे जाकर जिवन में बहुत अच्छा काम किये हैं ...मेरी तो दिली इक्षा है की भविष्य में एक विदालय असफल बच्चों लिए खोलूं...

पर फ़िलहाल एक महतवपूर्ण जानकारी १०विन या १२विन में फ़ेल विद्यार्थियों लिए . अगर आप इस वर्ष अपने बोर्ड की परीक्षा में सफल नहीं हो सके और अपना साल बर्बाद नहीं करना चाहते हैं तो है एक रास्ता आपके लिए. ये मार्ग है NIOS(राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान) का

NIOS १०विन और १२विन में अनुत्रिन बच्चों लिए लिए
ON DEMAND EXAM की सुविधा प्रदान करता है . आप इस सुविधा का लाभ लेकर इसी वर्ष अपनी १०विन या १२ विन लिए इम्तहान में पास हो सकते हैं . ये काफी सरल है . इसमें बस एक कठिनाई है की इसका exam center केवल Noida में होता है , यानि आपको परीक्षा देने लिए लिए Noida जाना होगा .

विस्तृत जानकारी लिए लिए ये लिंक देखें

On Demand Exam detail for Secondary(10th standard)

On Demand Exam detail for Senior Secondary (12th Standard)

इसके अलावा आप फोन से भी संपर्क कर सकते हैं

0120-2402294, 2404914 (outside Delhi) (95120-2402294, 2404914) (From Delhi)



अगर आगे कोई भी दिक्कत हो तो मुझसे संपर्क करें, मैं यथासंभव मदद करने का प्रयास करूंगा ...हाँ भाई आपलोग मुझे NIOS का एजेंट मत समझ लेना ...:)


और सभी ब्लॉगर बंधुओं से अनुरोध है की इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाएं ...कोई बच्चा कहीं अपनी असफलता से मायूस हो कर कोई गलत कदम न उठा ले ....

हाँ इस पोस्ट के जरिये अपनी बहन गुडिया जिसने ३रे प्रयास में १२विन (विज्ञानं) प्रथम श्रेणी से उतीर्ण किया, उसे ढेरों बधाइयाँ देना चाहता हूँ ...गुडिया हमें तुम पर नाज है . तमाम मुश्किलों के बावजूद गुडिया ने कभी हार नहीं मानि और आखिर कर उसने सफल होकर दिखाया ...

इसी विषय पर एक पुराना पोस्ट भी पढें

Friday, June 12, 2009

कोसी से गंगा पदयात्रा

कोसी से गंगा तक एक पदयात्रा आयोजित होने जा रही है . विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ देखें