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Sunday, March 28, 2010

ये कैसा न्याय ?

जी हाँ ६ साल और ३ महीने के बाद एक शहीद को जो न्याय मिलना चाहिए नहीं मिला...उनकी आत्मा हमेशा भटकती रहेगी ...
मैं बात कर रहा हूँ सत्येन्द्र दुबे जी की ....कल पटना में एक अदालत ने ३ लोगों को इस केस में आजीवन कारावास की सजा दी...

ये सजा न्याय के नाम पर नौटंकी नहीं तो और क्या है...मैं तो कहता हूँ की इन तीनों को हिन् सजा देनी थी सीबीआई को तो फिर ये ६ साल और ३ महीने की देरी क्यों...कोई अपनी जान देश के ऊपर न्योछावर किया और उसे आप एक चोरी और लूटपाट का केस बना कर छोड़ देते हैं ...इस से तो अच्छा अंग्रेजी राज था जहाँ देश के लिए मरने वालों को शहीद का दर्जा तो कम-से-कम मिलता था ...यहाँ तो वो भी नसीब नहीं ...

और जरा सीबीआई का बयान पढ़िए ...

The CBI conducted “an impartial, fair and professional investigation in the case,” the agency said in a statement.
इस से अच्छा होता की इस केस की कोई जांच नहीं होती ...ना हिन् इतने धन की बर्बादी होती और ना हिन् आम आदमी को एक आशा लगी रहती की सीबीआई जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ...

मैं बस सीबीआई से इतना हिन् कहना चाहूँगा की न्याय नहीं दिलवा सकते तो नहीं दो ...पर एक देशभक्त की शहादत को चोरी के केस में मत बदलो...सत्येन्द्र दुबे की हत्या इन तीन लोगों ने नहीं इस देश के भ्रष्ट नेता और माफियाँ वाले लोगों ने की है ...ये कोई चोरी या लूटपाट का केस नहीं है ...दुबे जी ने अपनी जान सत्य की लड़ाई के लिए न्योछावर की है ...और उन्हें सीबीआई या यहाँ की भ्रष्ट न्याय प्रणाली से कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए...

Friday, November 27, 2009

सत्येन्द्र दुबे जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

सत्येन्द्र दुबे जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

आज से ६ साल पहले आज के हिन् दिन सत्येन्द्र दुबे जी की निमर्म हत्या कर दी गयी थी . आज भी उनकी आत्मा न्याय के लिए तड़प रही होगी....क्या इस देश में ऐसे वीर सपूतों को न्याय मिलेगा कभी...या उनका बलिदान व्यर्थ हिन् जाएगा...और भविष्य में जो भी सत्य के पथ पर चलेगा उसे ऐसा धमकाया जाएगा की "देखें नहीं थे की सत्येन्द्र दुबे का क्या हाल हुआ था, तुम्हारा भी वही हश्र होगा " .
मैं जब भी इन विषयों के ऊपर सोचता हूँ तो अपने आप को बहुत निसहाय मह:सूस करता हूँ ...देश में न्याय प्रणाली के ऐसे हालत होने के बाद भी हमारे प्रधानमंत्री देश से हजारो मिल दूर बैठ कर देश के "जनतंत्र" पर गर्व फरमाते हैं ...
खैर छोडिये इन बातों को ...
अभी पिछले दिनों मैंने फिर से प्रयास किया था की सत्येन्द्र दुबे जी के केस में कुछ किया जाए . शैलेश गाँधी जी के article से प्रभावित होकर मैंने एक RTI PMO में डाला पर उसका कोई जवाब नहीं आया ..
कुछ व्यक्तिगत समस्याओं में उलझने के कारन फिर उसका अपील नहीं कर पाया . वैसे आप सभी को बता दूं की शैलेश गाँधी एक बड़े RTI एक्टिविस्ट थे, पर अब वो एक सरकारी मुलाजिम(मुख्य सूचना अधिकारी ) हो गए हैं ...और जब मैंने उनसे इस केस में मदद मांगी तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया ...

अभी भी CBI के वेबसाइट पर इस केस का पूरा अपडेट उपलब्ध नहीं है. आप एक नजर यहाँ डालें

आखिरी समाचार मीडिया में इस केस से जुडा २३ जून २००८ को आया था . इस केस से जुडा आरोपी फरार हो गया है ...ऐसे केस से जुड़े आरोपी को तो फरार करना हिन् पड़ता है, इसमें नया क्या है ...
मुझे पता नहीं उनके परिजन किस हालत में हैं, ...कभी इकषा है इस बारे में पता करून. देखिये कब हो पाता है ...

कुछ और ब्लॉग पर सत्येन्द्र जी की चर्चा है , एक नजर वहां भी डालें ...

ईमान मर नहीं सकता (एक कविता सत्येन्द्र दुबे जी को समर्पित ) केशवेन्द्र कुमार की तरफ से

कब बदलेगी यह नौकरशाही...

Thursday, July 02, 2009

पांडिचेरी से बिहार तक सत्य बोलने वालों की एक हिन् सजा होती है ...

पांडिचेरी से बिहार तक सत्य बोलने वालों की एक हिन् सजा होती है ...

अपने देश में सत्य बोलने वालों का एक हिन् अंजाम होता है और वो है मौत और गुमनामी ...

एक नहीं अनगिनत लोग भरे पड़े हैं :

किसकी बात करूँ सत्येन्द्र दुबे जी की या मंजुनाथ जी की या फिर कुछ दिन पहले मरे योगेन्द्र पाण्डेय जी की ....वही कहानी दुहरायी जा रही है हर जगह . और हाँ अगर आपलोग सोचते हैं की CBI जाच से कुछ न्याय मिलेगा तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल है ...ऐसी शहादतों ं को CBI चोरी और लूट का केस बना कर ख़तम कर देती है ...

बहुत गुस्सा आता है इस व्यवस्था पर, जिसका मैं भी एक अंग हूँ ....और अपनी अक्रमंयता पर भी...


और हाँ हम जनता भी कितना याद करते हैं इनको, एक दिन के अन्दर हिन् सब भूल जाते हैं ...मीडिया के पन्नों से भी इन लोगों का नाम यूँ हिन् तुंरत गायब हो जाता है ...

क्या करूँ बहुत असहाय महसूस करता हूँ ...पर कुछ तो करना है ...