Wednesday, May 21, 2008
क्या यही लोकतंत्र है ?
और जहाँ तक ओरकुट की बात है तो वहाँ पे हजारो फेक प्रोफाइल और उलटी-सीधी चीजें पड़ी हैं , शिकायत करने के बाद भी कोई कारवाई नहीं होती है , पर इस बेचारे ने क्या एक कमेंट कर दिया हो गई जेल , क्या यही है prajatantra ?
यहाँ तो वही पुराना डार्विन का
सिद्धांत लगा "Survival of fittest" , या फ़िर गवई भाषा में बोलें तो "जिसकी लाठी उसकी भैस " ।
Orkut community ka link
http://www.orkut.com/Community.aspx?cmm=39208843
news on IBN
http://www.ibnlive.com/news/boy-held-for-slandering-sonia-on-orkut/65642-11.html
aur ye ek aur blog pe kuch baatein legal comments ke saath
http://ortuk.blogspot.com/2008/05/hate-communities-can-be-charged-under.html
तो आप सब अपने-अपने विचार रखें इस बारे में , आप क्या सोचते हैं ये लोकतंत्र की हत्या के समान नही है ?
Sunday, May 18, 2008
एक कविता Suraj के नाम
आज मैं बीज हूँबस, थोडी और उमस
बस, थोडी और धुप
बस, थोड़ा और पानी
बस, थोडी और हवा
बस थोड़ा और भुर्भुरापन
क्या देर है भला बाहर आने में ।
आज मैं बीज हूँ
कल रहुँगा अंकुर
बटुर-बटुर आएगी दुनिया, मुझे देखने को आतुर
आज मैं बीज हूँ
अलक्षित, ना-चीज हूँ
गर्क हूँ धरती की जादुई कोख में ।
-नागार्जुन ।
Saturday, May 17, 2008
Suraj को बचाओ
Thursday, April 03, 2008
खबर लहरिया
खबर लहरिया के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए एक नजर निचे दिए गए लिंक पे :
वर्तमान में इस समाचार पत्र के पाठकों की संख्या १५०० तक पहुच गई है .
Tuesday, April 01, 2008
सूरज कहीं डूब ना जाए ...
पटना। दोनों किडनी फेल हो चुके सूरज को राजधानी के बच्चों ने अपने बूते लोगों को जागरुक कर उसकी किडनी बदलवाने में मदद तो कर दी पर अब सूरज का संकट यह है कि उसके पास दवा तक लिए पैसे नहीं। एक दिन की दवा पर हजार रुपए का खर्च आता है। कहां से लाए सूरज इस राशि को?
दर-दर गुहार लगा रहा वह और फिर निराश हो यह कहता है कि अब हिम्मत हार रहा हूं।
फतुहा का रहने वाला सूरज एक समय साइंस कालेज का होनहार छात्र था। सूरज के दोनों किडनी फेल होने की खबर सुनकर जगदेव पथ की रहने वाली पूनम सिंह उसके पास पहुंची और फिर सूरज के लिए अभियान चलाकर उसके इलाज की व्यवस्था करायी। फतुहा में सूरज के लिए बच्चों व स्थानीय लोगों ने अभियान चलाया। सूरज की मदद इतनी हुई कि एक स्थानीय अस्पताल ने सूरज को उसके भाई की सहमति से उनकी किडनी को प्रत्यारोपित कर दिया। पूरे आपरेशन के लिए थोड़ी भी राशि नहीं ली अस्पताल ने।
आपरेशन के बाद सूरज को पूनम सिंह अपने जगदेव पथ स्थित फ्लैट में रख रही है। उसके इलाज पर होने वाली पूरी राशि व भोजन का प्रबंध अपने स्तर से कर रही है। पूनम का कहना है कि अब उसकी हिम्मत भी जवाब दे रही है। आखिर कितने दिनों तक वह सूरज को अपने पास रखेंगी। दवा के लिए मोटी राशि का प्रबंध कहा से होगा? सूरज को डायबिटिज भी हो गया है। वह चाहता है कि सरकार अपने स्तर से उसके लिए दवाईयों की व्यवस्था कर दे।
आपने पढ़ा न की बच्चे और श्रीमती पूनम सिंह जी किस कदर सूरज को बचाने में लगे हुए हैं. तो क्या आप नहीं चाहते सूरज अपनी बची हुई जिंदगी जिए न की अकाल मृत्यु का शिकार हो जाए .....मैं इस बच्चे तक पहुचने का रास्ता ढूंढ रहा हूँ ....
