Wednesday, August 01, 2007

प्रेमचन्द

प्रेमचंद जी के जनम्दिवास पे कुछ खास सामग्री तो नही ला पाया। चलिये थोड़ी देर से हिन् सही नागार्जुन जी के द्वारा लिखी गयी प्रेमचंद कि जीवनी आपलोग के सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
















Friday, June 22, 2007

एक किवता सन् 1857 की आजादी के समय का

हम हैं इसके मािलक, िहनदुस्तान हमारा
पाक वतन है कौम का, जन्नत से भी प्यारा
ये हैं हमिर िमल्िकयत, िहनदुस्तान हमारा
इसकी रुहािनयत से, रोशन है जग सारा
िकतना कदीम िकतना न-ईम, सब दुिनया से न्यारा
आया िफ़रंगी दूर से, ऐसा मंतर मारा
लूटा दोनो हाथों से, प्यारा वतन हमारा
आज शहीदों नें है तुमको, अहले-वतन ललकारा
तोड़ो गुलामी की जंजीरं, बरसाओ अंगारा
िहंदु-मुसलमं-िसख हमारा, भाई-भाई प्यारा
यह हैं आजादी का झंडा, इसे सलाम हमारा ।।

Wednesday, April 11, 2007

Saturday, March 24, 2007

बच्चू बाबू

बच्चू बाबू एम.ए. करके सात साल झख मारे
खेत बेंचकर पढ़े पढ़ाई उल्लू बने बिचारे

कितनी अर्ज़ी दिए न जाने कितना फूँके तापे
कितनी धूल न जाने फाँके कितना रस्ता नापे

लाई चना कहीं खा लेते कहीं बेंच पर सोते
बच्चू बाबू हूए छुहारा झोला ढोते-ढोते

उमर अधिक हो गई नौकरी कहीं नहीं मिल पाई
चौपट हुई गिरस्ती बीबी देने लगी दुहाई

बाप कहे आवारा भाई कहने लगे बिलल्ला
नाक फुला भौजाई कहती मरता नहीं निठल्ला

खून ग़‍रम हो गया एक दिन कब तक करते फाका
लोक लाज सब छोड़-छाड़कर लगे डालने डाका

बड़ा रंग है, बड़ा मान है बरस रहा है पैस

-सौजन्य युनुस िज

Thursday, February 08, 2007

कमलेश्वर जी क। पिरचय

जन्म स्थल ः मैनपुिर

कहािन सन्गर्ह :
  1. राजा िनरबन्िसया और कस्बे का आदिम
  2. मान्स का दिऱया
  3. खोई हुई िदशाऍ
  4. बयान
  5. जार्ज पन्चम िक नाक
  6. आजिद मुबारक
  7. कोहरा
  8. िकतने अच़्छे िदऩ
  9. मेिर िपऱ्य कहािऩयॅा
उपऩ्यास ः
  1. एक सङक सतावन गिलयॉ
  2. डाक बन्गला
  3. तीसरा आदमी
  4. समुदर् मेन् खोया हुआ आदमी
  5. लौटे हुए आदमी
  6. काली आन्धी
  7. वही बात
  8. आगामी अतीत
  9. सुबह् दोपह्र शाम
  10. िकतने पािकस्तान
  11. पित पत्नी और वह्