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Thursday, January 01, 2009

पगलू भैया का विकेट गिर गया ...

अरे भैया का बताये आपलोगों को अभी कुछ हिन् दिन पहले हमको मालूम हुआ की पगलू भैया तो खूटे से बंध गए और जनाब एक चिट्ठी-पत्री तक नहीं भेजें घोर कलयुग आ गया है भैया क्या कहा जाए ....

हमारे पगलू भैया २१ नवम्बर २००८ को परिणय सूत्र में बंध गए , हम सभी की तरफ़ से पगलू भैया और भाभी जी को ढेरों बधाईयाँ ...

अब अगर आप नहीं जानते हैं की हम किस पगलू की बात कर रहे हैं तो हम आपको बता देन उनके बारे में कुछ । ये पगलू भैया हैं जो जीवन में कुछ हट कर करना चाहते हैं, हरपल जरुरतमंदों की मदद, पटना के एक समय में युवा नेता और ना जाने क्या-क्या ....

भाभी जी की तो कोई तस्वीर अभी तक पगलू भैया ने नहीं भेजी है, पर पगलू भैया की एक तस्वीर कहीं से ढूंढ कर मैं यहाँ लगा रहा हूँ ।




ऑरकुट कम्युनिटी से पगलू भैया का परिचय :

don't know this pagal , u don't deserve knowing it.. ;=) xx@!#

pagal he..he..he no she,.. pagal


एक कविता पगलू भैया का, जो मैं उनके ब्लॉग से बिना अनुमति के उठा कर यहाँ रख रहा हूँ ....

Main Aaoonga Tujhse Milne!!!



Kitne din ho gayein..... Kitne din????

Kab se tujhe dekha nahi hai.... Kab Se????

Yaad nahi.....

Kya tu abhee bhee waisee hee dikhtee hogi.... Pata nahi!!!

Dekhna main aaoonga, tere paas.... bahut jaldi.... milne tujhse

Kuch bhee nahi to hai mere pass tere liye..... phir ... phir bhee koshish karoonga tujhe kuch de ke aane ko.....

Pata nahi shayad... pata nahi.... kya doonga main tujhe....

kya doonga... kuch bhee to nahi mere pass..... Pata nahi....

Dekhna.... bhoolna mat mujhe..... Main nahi bhoola hoon tujhe....

Pata nahi ... shayad Baris ke paani me sab kuch dhul gaya hoga.... kya dhul gayee hai meri yaad bhee....

Kya wo Baris ka paani, meri yaadon ko baha le gaya... pata nahi....

Khair... main aaoonga milne... tujhse milne!!!!


ठीक है पगलू भैया आप शादी में नहीं बुलाए तो क्या जब भी मिलूँगा सब हिसाब सूद सहित लूँगा....एक बार फ़िर से आपको और भाभी जी को मंगल भविष्य अवं नववर्ष की शुभकामनायें हमलोगों को तरफ़ से .....

वैसे जाते-जाते मैं आपलोगों को बता दूँ की मेरे कुछ और मित्र हैं जो अपने आप को पागल समझते हैं या फ़िर यों कहें की जो पागल बन्ने की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं । उनमें से कुछ के नाम मैं इस पोस्ट में लेना चाहूँगा : एक तो हैं भैया चिट्ठाजगत के धुरंधर लिक्खाड़ पर्शांत (पर शांत ) बाबू , दुसरे पुर्नेंदु भाई और एक मेरा मित्र है यहाँ गाँधीनगर में प्रतिक (इसका भी विकेट जल्द हिन् गिरने वाला है ) । इन सब के पागलपन की कहानी किसी और दिन ....अब आप ख़ुद हिन् समझ सकते हैं इतने पागलों का साथी क्या हो सकता है ....पागल और क्या !!!

तो एक बार जोर से सब मिलके बोलो पगलू भैया और पागलपन की जय !!!