Monday, June 02, 2008

चिन्च्पोड़ त्रासदी ( Chinchpod Disaster)

चिन्च्पोड़ ग्राम मध्य भारत के महराष्ट्र प्रदेश के यवतमाल जिले में अवस्तिथ है । २४ मई की दोपहर जब चिन्च्पोड़ ग्राम के लोग आराम कर रहे थे तो अचानक से एक छोटी सी झोपडी में आग लग गई, और उस आग की चपेट में १ घंटे के भीतर पुरा गावँ आ गया, देखते हिन् देखते सारे के सारे घर इस आग के चपेट में आ गए । इन गरीबों का आशियाना इनसे भगवान ने छीन लिया, ऐसे में इनके लिए भगवान् का रूप बन कर आए बाबा आमटे के सुपुत्र श्री विकाश आमटे और उनकी संस्था, इन सभी लोगों ने मिलकर इनके रहने और खाने का इन्तजाम किया है, और अब इनके पुनर्वास कार्यक्रम की योजना भी चला रहे हैं । ऐसे में हमारा भी कुछ फर्ज बनता है , जो भी थोड़ाबहुत सम्भव हो आप अपना सहयोग "ग्रामीण विकाश प्रकल्प " संस्था तक जरुर पहुचाएँ ।

कुछ तस्वीरें इस हादसे की और कैंप
की


ज्यादा जानकारी और मदद के लिए निचे दिए गए पते पर सम्पर्क करें :
For more information and donation please contact :

The Assistant Secretary,
Maharogi Sewa Samiti, Warora
At & Post : Anandwan - 442914
Tahsil : Warora
Phone: +91-7176 - 282034 / 282425
E-mail : anandwan[at]gmail[dot]com
Please replace [at] by @ and [dot] by .


तो देर किस बात की मेरे दोस्तों जो बनता है वो करें इन गरीब भाई बहनो के लिए , विकास आमटे जी और उनकी
संस्था तो पहले से हिन् इस काम में लगी है, अब हमारा फर्ज बनता है की हम भी यथासंभव विकास आमटे जी का सहयोग करें ताकि वो इस कार्य को सफलतापूर्वक कर सकें ....

और हाँ हमारे न्यूज़ चैनल वालों के लिए ये ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं था क्योंकि ये तो गरीबों की दास्ताँ हैं मेरे दोस्त , अगर
धनाढ्य लोगों का कुत्ता भी गुम हो जाए तो ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाता है, धन्य है हमारी मीडिया ......

"ग्रामीण विकास प्राकल्प" के तरफ़ से आम जनता से सहयोग की अपील : English और Marathi में ।


Sunday, June 01, 2008

दक्कन की रानी को ७८वेन् जन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ ...

१ जून १९३० को "दक्कन की रानी" ने पुणे से मुम्बई के बिच सफर करना शुरु किया था, और उस दिन से आज तक ये अनवरत चलती हिन् जा रही है । यह गाड़ी साक्षी है कितने क्रितिमानों का, इसने सेवा की कितने विद्यार्थियों की, कितने हिन् कर्मचारियों को हर दिन सुबह मुम्बई ले जाती है और पुनः शाम को वापिस उनके घर पुणे छोड़ने आती हैं , सब कुछ किस निस्वार्थ भाव से करती है मेरी दक्कन की रानी , ये ना तो किसी धर्म ना हिन् किसी जाती ं का भेदभाव करती है, ते तो सबको बराबर ं का सम्मान देती है, कितनी समझदार है.... और एक हम मानव जाती के लोग कुछ भी नहीं सीखते इससे, आए दिन करते हैं दंगा धर्म के नाम पे, पिटते हैं लोग दलितों को जाती के नाम पे, कुछ तो सीखो इस "दक्कन की रानी " से मूढ़ मानव ....

आज "दक्कन की रानी " ं का ७८वान् जन्मदिन हैं । इस अवसर पर हमारी ओर से ढेरों बधाईयाँ, ऐसे हिन् दक्कन की रानी अपने जीवन में आगे बढ़ते रहे और लोगों को भी जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे, हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं ।

अगर आपने आज तक "दक्कन की रानी " से सवारी नहीं की है तो एक बार जरुर कीजये । मैं पहली बार पिछले वर्ष इसी दिन पुणे से मुम्बई की यात्रा "दक्कन की रानी" से की थी । हम सभी दोस्त मिलकर इसका जन्मदिन भी मनाये थे , और मुम्बई में विविध भारती में अपनी मुलाकात यूनुस जी से भी हुई थी, यूनुस जी से मुलाकात की बातें कभी बाद में, फिलहाल तो कुछ और जानकारी "दक्कन की रानी " के बारे में ।


ट्रेन न. ट्रेन नाम दिनांक चलने के दिन
2124 डेक्कनक्वीन 02/06/2008 सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि रवि
क्र.स. स्टेशन कोड स्टेशन नाम रूट न. आगमन समय प्रस्थान समय दूरी दिन टिपण्णी
1 PUNE पुणे जं. 1 आरंभिक स्टेशन 07:15 0 1
2 LNL लोनावला 1 08:08 08:10 64 1
3 DR दादर 1 10:11 10:13 183 1
4 CSTM मुंबई सीएसटी 1 10:30 गंतव्य 192 1

कुछ तस्वीरें


पुराने ज़माने के सूचना पटल पर "दक्कन की रानी " ं का नाम इस तस्वीर में आप देख सकते हैं।



"दक्कन की रानी" ं का ७५वान् जन्मदिन

पिछले वर्ष के जन्मदिन की तस्वीर,
इस नाचीज को अपनी आखों से रूबरू ये मंजर देखने ं का मौका मिला था ।

अगर इस वर्ष के समारोह में आपने भाग लिया है, तो इसके बारे में जरुर बतायिएगा । कुछ तस्वीरें यहाँ वहां से दूंध के पहले से मेरे पास जमा थी इसलिए उसका उचित सन्दर्भ मैं यहाँ नहीं डाल पा रहा हूँ उसके लिए खेद है ।

Thursday, May 29, 2008

दिल्ली और दलित !!!

मैंने तो सुना था दिल्ली दिलवालों का शहर है , पर आज ये सब कोरा बकवास लग रहा है । यहाँ भी वही है जो पूरे भारत में वर्षों से चला आ रहा है या यों कहें की पूरे विश्व में एक खास वर्ग के साथ हमेशा ऐसा हिन् होता आया है । अगरआपलोगों ने दलित के ऊपर अत्याचार की ये नई-ताज़ी कहानी नही पढी तो पहले विस्तार से पढ़ लें :

दलित की इज्जत, लाख रुपये के भीतर ही


हम युवा वर्ग को जागना होगा और ऐसी घटनाओं का मुह्तोड़ जवाब देना चाहिए । मेरे समझ से हम इस केस में RTI फाइल कर सकते हैं , की पुलिस ने क्यों नही इस लड़की का केस दर्ज किया ? या फ़िर हम सभिलोग मिलकर "Human Right Commission " को लिख कर इस केस के बारे में बताएँ और उनपे ये दवाब डाला जाए की उस व्यक्ति के ऊपर सख्त से सख्त करवाई हो । मुझे कुछ ज्यादा जानकारी तो नही है इन नियमों के बारे में , सो अगर किसी बंधू को इन बातों की जानकारी हो तो हमारा मार्गदर्शन करें । हम सब कनकलता जी और उनके परिवार के साथ हैं ।

और हाँ दलित के ऊपर सोध और भाषान्बजी करने वालों से दोस्तों कोई उम्मीद मत रखिये , ये भाषण देना औरपुस्तकें लिखना उनका पेशा है, जीविकोपार्जन
का ना की वो दलितों का उत्थान करना चाहते हैं । और भइया अगरदलित हिन् ना होंगे, दलित से जुड़ी समस्याएँ जब नही होंगी तो वैसे लोग अपना पेट कैसे भरेंगे ? तो कोई अपने पेट पे तो लात नही मारेगा ना !!!

एक कविता : यमराज की दिशा

आज सुबह-सुबह अपने छोटे भाई के पाठ्य पुस्तक में ये कविता पढी । सोचा आपलोगों के साथ इसे बाटूं । आज के परिपेक्ष्य में यह कविता काफी सटीक है । चंद्रकांत देवताले जी की यह रचना है, "यमराज की दिशा " । आप पढियेऔर ख़ुद हिन् बतायिए की आज के दौर में ये कविता कितनी सार्थक है या नही ....

यमराज की दिशा

माँ की इश्वर से मुलाकात हुई या नहीं
कहना मुश्किल है
पर वह जताती थी जैसे इश्वर से उसकी बातचीत होते रहती है
और उससे प्राप्त सलाहों के अनुसार
जिंदगी जीने और दुःख बर्दास्त करने का रास्ता खोज लेती है

माँ ने एक बार मुझसे कहा था -
दक्षिण की तरफ़ पैर कर के मत सोना
वह मृत्यु की दिशा है
और यमराज को क्रुद्ध करना
बुद्धिमानी की बात नही है

तब मैं छोटा था
और मैंने यमराज के घर का पता पूछा था
उसने बताया था-
तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा दक्षिण में

माँ की समझाइश के बाद
दक्षिण दिशा में पैर करके मैं कभी नही सोया
और इससे इतना फायदा जरुर हुआ
दक्षिण दिशा पहचानने में
मुझे कभी मुश्किल का सामना नही करना पड़ा

मैं दक्षिण में दूर-दूर तक गया
और हमेशा मुझे माँ याद आई
दक्षिण को लाँघ लेना सम्भव नहीं था
होता छोर तक पहुँच पाना
तो यमराज का घर देख लेता

पर आज जिधर पैर करके सोओं
वही दक्षिण दिशा हो जाती है
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आखों सहित विराजते हैं

माँ अब नही है
और यमराज की दिशा भी अब वह नहीं रही
जो माँ जानती थी

-चंद्रकांत देवताले ।

आखिरी अंतरा पर आपलोग जरा ध्यान देंगे "पर आज जिधर पैर करके सोओं वही दक्षिण दिशा हो जाती है" ।

Saturday, May 24, 2008

हाँ मुझे इंग्लिश नही आती ...

आजाद हुए हमे ६० साल से ज्यादा हो गया पर भाषा की गुलामी से अभी तक हम छुटकारा नहीं पा सके हैं । मुझे किसी भाषा से कोई परहेज नही है, पर हाँ लोगों की गुलाम मानसिकता से जरुर मन दुखी होता है । पूरे भारत का यही हाल है , अगर आपको इंग्लिश भाषा का ज्ञान नही है तो लोग आपको अव्वल दर्जे का बेवकूफ समझते हैं । ये लोग अभी भी गुलाम हैं अंग्रेजो के नही अंग्रेजी के ... खास कर के जब हमारे सरकारी महकमे के लोग भी ऐसा करते हैं तो मन और दुखी हो जाता है । आप किसी भी सरकारी दफ्तर में जाईए और हिन्दी या अपनी क्षेत्रीय भाषा में बात कीजये तो वो आपकी बात सीधे मुँह नहीं सुनेगें । और जनाब जरा इंग्लिश में बात करके तो देखिये कैसे वो आपको सलाम ठोकने लगेंगे.....

बस अगर कोई काम करवाना है तो आप एक सवाल का जवाब दीजिये, क्या आप हैं

अगर जवाब है हाँ, तो इस देश में हो जाएगा आपका काम आसन, जनाब लोग देंगे आपको सम्मान, आपकी बढेगी शान .....ये है इंडिया मेरी जान !!!